कर्णस्य दानप्रतिज्ञा–शल्योपदेश–वाक्ययुद्धम्
Karna’s Gift-Vows, Shalya’s Counsel, and the Battle of Words
इस प्रकार श्रीमह्याभारत कर्णपर्वमें संशप्तकोंकी पराजयविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ २७ ॥। नशा (0) आज अत +> अष्टाविशोश् ध्याय: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम संजय उवाच युधिष्ठिरं महाराज विसृजन्तं शरान् बहुन् । स्वयं दुर्योधनो राजा प्रत्यगृह्लनादभीतवत्,संजय कहते हैं--महाराज! बहुत-से बाणोंकी वर्षा करते हुए युधिष्ठिरका स्वयं राजा दुर्योधनने एक निर्भीक वीरकी भाँति सामना किया
sañjaya uvāca | yudhiṣṭhiraṃ mahārāja visṛjantaṃ śarān bahūn | svayaṃ duryodhano rājā pratyagṛhṇād abhītavat ||
సంజయుడు పలికెను—మహారాజా! అనేక బాణములను విడిచుచున్న యుధిష్ఠిరుని ఎదుట రాజు దుర్యోధనుడు తానే నిర్భయ వీరునివలె ముందుకు వచ్చి ఎదుర్కొనెను.
संजय उवाच