Cakravyūha-saṃkalpaḥ, Saṃśaptaka-āhvānaṃ, Saubhadra-vikrīḍitam
Drona Parva, Adhyāya 32
अजातशणत्रुस्तान् योधान् भीम॑ त्रातेत्यचोदयत् । ते ययुर्भीमसेनस्य समीपममितौजस:,तत्पश्चात् भयंकर गर्जना करते हुए भीमने रणक्षेत्रमें उन सबका सामना किया। भीमसेन मृत्युके तुल्य अवस्थामें पहुँच गये थे और अपने प्राणोंका परित्याग करना चाहते थे। उसी समय अजातशत्रु युधिष्ठिरने अपने योद्धाओंको यह कहकर आगे बढ़नेकी आज्ञा दी कि “तुम सब लोग भीमसेनकी रक्षा करो।” यह सुनकर वे अमित तेजस्वी वीर भीमसेनके समीप चले
sañjaya uvāca | ajātaśatrus tān yodhān bhīmaṃ trātety acodayat | te yayur bhīmasenasya samīpam amitaujasaḥ ||
సంజయుడు పలికెను—అజాతశత్రువు ఆ యోధులను ప్రేరేపించి, “భీముని రక్షించండి” అని చెప్పెను. అది విని అపార పరాక్రమశాలులు భీమసేనుని సమీపానికి చేరిరి.
संजय उवाच