उपायैः पूर्ववधकथनम् / Strategic Justifications for Prior Eliminations
दुर्योधनपुरोवातां रथनागबलाहकाम्,तां प्राविशन्नतिभयां सेनां युद्धचिकीर्षव: । युद्ध करनेकी इच्छावाले सैनिकोंने उस अत्यन्त भयंकर सेनामें प्रवेश किया, जो मेघोंकी घटाके समान जान पड़ती थी। दुर्योधन उसके लिये पुरवैया हवाके समान था। रथ और हाथी बादलोंके दल थे। रणवाद्योंकी गम्भीर ध्वनि मेघोंकी गर्जनाके समान जान पड़ती थी। धनुष और ध्वज बिजलीके समान चमक रहे थे। द्रोणाचार्य और पाण्डव पर्जन्यका काम देते थे। खड़ग, शक्ति और गदाका आघात ही वज्रपात था। बाणरूपी जलकी वहाँ वर्षा होती थी। अस्त्र ही पवनके समान प्रतीत होते थे। सर्दी और गर्मीसे व्याप्त हुई वह अत्यन्त भयंकर उग्र सेना सबको विस्मयमें डालनेवाली और योद्धाओंके जीवनका उच्छेद करनेवाली थी। उससे पार होनेके लिये नौकास्वरूप कोई साधन नहीं था
sañjaya uvāca | duryodhana-purovātāṁ ratha-nāga-balāhakām | tāṁ prāviśann atibhayāṁ senāṁ yuddha-cikīrṣavaḥ ||
సంజయుడు పలికెను—యుద్ధం చేయదలచిన వీరులు మేఘఘటలవలె కనిపించే ఆ అత్యంత భయంకర సేనలో ప్రవేశించిరి; దుర్యోధనుడు దానికి ముందుగా వీచే పురవాయువులా, రథములు మరియు గజబలములు మేఘసమూహాలలా ఉండెను. అటువంటి ఆయుధతుఫానంలో అడుగుపెట్టినవాడు ప్రాణమును, వివేకమును కూడ కోల్పోవును; దానిని దాటించు నావవంటి ఆశ్రయం ఏదియు లేదు।
संजय उवाच