Bhūriśravas–Sātyaki Saṃvāda and Duel; Arjuna’s Intervention (भूरिश्रवाः–सात्यकि संवादः, युद्धम्, अर्जुन-हस्तक्षेपः)
रुक्मवर्मधर: शूरस्तपनीयाड्रद: शुचि:,उरसा धारयन् निष्कं कण्ठसूत्रं च भास्वरम् | शूरवीर एवं पवित्र जलसंधने अपने शरीरमें सोनेका कवच धारण कर रखा था। उसकी दोनों भुजाओंमें सोनेके ही बाजूबंद शोभा पा रहे थे। दोनों कानोंमें कुण्डल और मस्तकपर किरीट चमक रहे थे। उसके हाथमें तलवार थी और सम्पूर्ण शरीरमें रक्त चन्दनका लेप लगा हुआ था। उसने अपने सिरपर सोनेकी बनी हुई चमकीली माला और वक्ष:स्थलपर प्रकाशमान पदक एवं कण्ठहार धारण कर रखे थे
rukmavarmadharaḥ śūras tapanīyāṅgadaḥ śuciḥ | urasā dhārayan niṣkaṁ kaṇṭhasūtraṁ ca bhāsvaram ||
ఆ శూరుడు, శుచిత్వంతో ప్రకాశిస్తూ, స్వర్ణకవచాన్ని ధరించి, శుద్ధ బంగారంతో చేసిన భుజబంధాలతో శోభించాడు. అతని వక్షస్థలంపై మెరిసే నిష్కం, కంఠంలో దీప్తిమంతమైన కంఠసూత్రం—యుద్ధార్థం వైభవంతో అలంకృతుడు.
संजय उवाच