Vāsudeva-Māhātmya: Duryodhana’s Inquiry and Bhīṣma’s Theological Account of Keśava
ततस्तु कृष्ण: समरे दृष्टवा भीष्मपराक्रमम् । सम्प्रेक्ष्य च महाबाहु: पार्थस्य मृदुयुद्धताम्,तदनन्तर महाबाहु श्रीकृष्णने उस समरांगणमें भीष्मका पराक्रम देखकर यह विचार किया कि अर्जुन तो कोमलतापूर्वक युद्ध कर रहा है और भीष्म युद्धस्थलमें निरन्तर बाणोंकी वर्षा कर रहे हैं। ये दोनों सेनाओंके बीचमें आकर तपते हुए सूर्यकी भाँति सुशोभित होते और पाण्डुपुत्र युधिष्ठिरके अच्छे-अच्छे सैनिकोंको चुन-चुनकर मार रहे हैं। युधिष्ठिरकी सेनामें भीष्मने प्रलयकालका-सा दृश्य उपस्थित कर दिया है
tatas tu kṛṣṇaḥ samare dṛṣṭvā bhīṣma-parākramam | samprekṣya ca mahābāhuḥ pārthasya mṛdu-yuddhatām ||
అనంతరం సమరంలో భీష్ముని పరాక్రమాన్ని చూసి, మహాబాహువైన పార్థుడు (అర్జునుడు) మృదువుగా యుద్ధం చేస్తున్నాడని గమనించిన శ్రీకృష్ణుడు మనసులో ఆలోచించాడు।
संजय उवाच