Vāsudeva-Māhātmya: Duryodhana’s Inquiry and Bhīṣma’s Theological Account of Keśava
प्रहरस्व नरव्याप्र न चेन्मोहाद विमुहा[से । 'पुरुषसिंह! जिसकी तुम दीर्घकालसे अभिलाषा करते थे, वही यह अवसर प्राप्त हुआ है। यदि तुम मोहसे किंकर्तव्यविमूढ़ नहीं हो गये हो तो पूरी शक्ति लगाकर युद्ध करो ।। ४२ -॥] यत् त्वया कथितं वीर पुरा राज्ञां समागमे,“वीर! पहले राजाओंकी मण्डलीमें तुमने जो यह कहा था कि “जो मेरे साथ संग्रामभूमिमें उतरकर युद्ध करेंगे, दुर्योधनके उन भीष्म, द्रोण आदि समस्त सैनिकोंको मैं सगे-सम्बन्धियोंसहित मार डालूँगा।” शत्रुसूदन कुन्तीनन्दन! अपनी उस बातको सत्य कर दिखाओ। अर्जुन! देखो, तुम्हारी सेना इधर-उधर भाग रही है
praharasva naravyāghra na cen mohād vimūḍhase |
సంజయుడు అన్నాడు—ఓ నరవ్యాఘ్రా! ప్రహరించు. మోహంతో విమూఢుడవు కాలేదంటే, సంపూర్ణ శక్తితో యుద్ధం చేయి.
संजय उवाच