यत् ते व्यवसितं तात तदस्माकमपि प्रियम् । तत् कुरुष्व महाराज युद्ध बुद्धि निवर्तय,“तात! तुमने जो निश्चय किया है, वह हमलोगोंको भी बहुत प्रिय है। महाराज! अब तुम वही करो। युद्धकी ओरसे अपनी चित्तवृत्ति हटा लो"
yat te vyavasitaṃ tāta tadasmākam api priyam | tat kuruṣva mahārāja yuddha-buddhiṃ nivartaya ||
తాతా! నీవు చేసిన నిశ్చయం మాకూ ప్రియమే. మహారాజా! అదే చేయుము—యుద్ధబుద్ధిని విరమింపుము.
संजय उवाच