स छिन्नधन्वा संक्रुद्ध: सृक्किणी परिसंलिहन् । शक्ति जग्राह तरसा गिरीणामणि दारणीम,अताडयन् रणे भीष्मं सहिता: सर्वसृञज्जया: । समस्त सूंजय वीर एक साथ संगठित हो भयंकर शतघ्नी, परिघ, फरसे, मुद्गर, मुसल, प्रास, गोफन, स्वर्णमय पंखवाले बाण, शक्ति, तोमर, कम्पन, नाराच, वत्सदन््त और भुशुण्डी आदि अस्त्र-शस्त्रोंद्वारा रणभूमिमें भीष्मको सब ओरसे पीड़ा देने लगे धनुष कट जानेपर क्रोधपूर्वक अपने मुँहके दोनों कोनोंको चाटते हुए भीष्मने बलपूर्वक एक शक्ति हाथमें ली, जो पर्वतोंको भी विदीर्ण करनेवाली थी
sa chinnadhanvā saṅkruddhaḥ sṛkkiṇī parisaṁlihan | śaktiṁ jagrāha tarasā girīṇām aṇi-dāraṇīm ||
సంజయుడు పలికెను—ధనుస్సు తెగిపోయిన భీష్ముడు కోపంతో, నోటి మూలలను నాకుతూ, పర్వత శిఖరాలనూ చీల్చగలదని చెప్పబడే ‘శక్తి’ అనే భాలాన్ని వేగంగా పట్టుకొనెను।
संजय उवाच