Śākadvīpa–Pramāṇa–Varṇana
Measurements and Description of Śākadvīpa
विहरन्ते रमन्ते च न तेषु म्रियते जन: । न तेषु दस्यव: सन्ति म्लेच्छजात्योडपि वा नूप,सातवाँ वर्ष कापिल कहलाता है। ये सात वर्षसमुदाय हैं। पृथ्वीपते! इन सबमें देवता, गन्धर्व तथा मनुष्य सानन्द विहार करते हैं। उनमेंसे किसीकी मृत्यु नहीं होती है। नरेश्वर! वहाँ लुटेरे अथवा म्लेच्छ-जातिके लोग नहीं हैं
viharanti ramante ca na teṣu mriyate janaḥ | na teṣu dasyavaḥ santi mlecchajātyo 'pi vā nṛpa ||
సంజయుడు అన్నాడు—అక్కడ జీవులు ఆనందంగా విహరిస్తూ క్రీడిస్తారు; ఆ ప్రాంతాలలో ఎవరికీ మరణం లేదు. ఓ రాజా, అక్కడ దొంగలు లేరు; మ్లేచ్ఛజాతి వారూ లేరు.
संजय उवाच