Adhyāya 108 — Nimitta-darśana and Drona’s counsel amid Arjuna’s advance (निमित्तदर्शनं द्रोणोपदेशश्च)
इस प्रकार श्रीमह्याभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्यवधपर्वमें सात्यकिका युद्धाविषयक एक सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १०४ ॥। अपना बछ। अफड-ण करा पञ्चाधिकशततमोब< ध्याय: मर आओ दुःशासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार- सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध संजय उवाच दृष्टवा भीष्म॑ रणे क्रुद्धं पाण्डवैरभिसंवृतम् । यथा मेघैर्महाराज तपान्ते दिवि भास्करम्
sañjaya uvāca |
dṛṣṭvā bhīṣmaṁ raṇe kruddhaṁ pāṇḍavair abhisamvṛtam |
yathā meghair mahārāja tapānte divi bhāskaram ||
సంజయుడు పలికెను—హే మహారాజా! యుద్ధరంగంలో క్రోధంతో ఉన్న భీష్ముని పాండవులు చుట్టుముట్టినట్లు చూచి—ఎలా అంటే, గ్రీష్మాంతంలో ఆకాశంలో మండే సూర్యుని మేఘాలు ఆవరించినట్లుగా.
संजय उवाच