Kārtavīrya–Samudra Saṃvāda and the Jāmadagnya Precedent (आश्वमेधिक पर्व, अध्याय २९)
(ब्राह्मणने कहा--) कमलके समान नेत्रोंवाली देवि! तदनन्तर राजा कार्तवीर्य बड़े क्रोधमें भरकर महर्षि जमदग्निके आश्रमपर परशुरामजीके पास जा पहुँचा और अपने भाई-बन्धुओंके साथ उनके प्रतिकूल बर्ताव करने लगा। उसने अपने अपराधोंसे महात्मा परशुरामजीको उद्दिग्न कर दिया। फिर तो शत्रु-सेनाको भस्म करनेवाला अमित तेजस्वी परशुरामजीका तेज प्रज्वलित हो उठा। उन्होंने अपना फरसा उठाया और हजार भुजाओंवाले उस राजाको अनेक शाखाओंसे युक्त वृक्षकी भाँति सहसा काट डाला ।| ८-- ११ || तं॑ हतं पतितं दृष्टवा समेता: सर्वबान्धवा: । असीनादाय शक्तीश्च भार्गव पर्यधावयन्,उसे मरकर जमीनपर पड़ा देख उसके सभी बन्धु-बान्धव एकत्र हो गये तथा हाथोंमें तलवार और शक्तियाँ लेकर परशुरामजीपर चारों ओरसे टूट पड़े
taṁ hataṁ patitaṁ dṛṣṭvā sametāḥ sarva-bāndhavāḥ | asīn ādāya śaktīś ca bhārgavaṁ paryadhāvayan ||
అతడు హతుడై నేలపై పడివున్నదాన్ని చూసి అతని బంధువులందరూ కూడి వచ్చారు. ఖడ్గాలు, శక్తులు చేతబట్టి వారు అన్ని వైపుల నుండీ భార్గవుడు (పరశురాముడు) మీదికి దూసుకొచ్చారు.
समुद्र उवाच