यतिरुवाच प्राणैर्वियोगे च्छागस्य यदि श्रेय: प्रपश्यसि । छागार्थे वर्तते यज्ञों भवत: कि प्रयोजनम्,यतिने कहा--यदि तुम बकरेके प्राणोंका वियोग हो जानेपर भी उसका कल्याण ही देखते हो, तब तो यह यज्ञ उस बकरेके लिये ही हो रहा है। तुम्हारा इस यज्ञसे क्या प्रयोजन है?
యతి అన్నాడు— “మేక ప్రాణాలు విడిపోయినా దాని శ్రేయస్సే జరుగుతుందని నీవు భావిస్తే, ఈ యజ్ఞం మేక కోసమే జరుగుతున్నట్టే. మరి నీకు ఈ యజ్ఞంతో ఏమి ప్రయోజనం?”
ब्राह्मण उवाच