Adhyāya 26 — Ekākṣara-Brahman (“Om”) and the Hṛdayastha Guru
Inner Teacher
ब्रह्मेव समिधस्तस्य ब्रह्मानिनि्रहद्यसम्भव: । आपो ब्रद्दा गुरुब्रह्य स ब्रह्मणि समाहित:,ब्रह्म ही उसकी समिधा है, ब्रह्म ही अग्नि है, ब्रह्मसे ही वह उत्पन्न हुआ है, ब्रह्म ही उसका जल और ब्रह्म ही गुरु है। उसकी चित्तवृत्तियाँ सदा ब्रह्ममें ही लीन रहती हैं
బ్రహ్మమే అతని సమిధ, బ్రహ్మమే అగ్ని; బ్రహ్మ నుండే అతని జననం; బ్రహ్మమే అతని జలం, బ్రహ్మమే గురువు. అతని చిత్తం ఎల్లప్పుడూ బ్రహ్మంలోనే లీనమై ఉంటుంది.
ब्राह्मण उवाच