Śrāddha-Kalpa: Pitṛ-Pūjā and Tithi-Phala (श्राद्धकल्पः पितृपूजा च तिथिफलम्)
दशपूर्वान् दशैवान्यांस्तथा संतारयन्ति ते,सुवर्णदानेडकरवं मतिं च भरतर्षभ | 'जो सुवर्ण दान करते हैं, वे अपने पहले और पीछेकी दस-दस पीढ़ियोंका उद्धार कर देते हैं।। राजन! जब मेरे पितरोंने ऐसा कहा तो मेरी नींद खुल गयी। उस समय स्वप्नका स्मरण करके मुझे बड़ा विस्मय हुआ। प्रजानाथ! भरतश्रेष्ठ! तब मैंने सुवर्णदान करनेका निश्चित विचार कर लिया
daśapūrvān daśaivānyāṁs tathā saṁtārayanti te | suvarṇadānena karavaṁ matiṁ ca bharatarṣabha ||
భీష్ముడు అన్నాడు—సువర్ణదానం చేసే వారు తమకు ముందున్న పది తరాలను, అలాగే తమ తరువాతి పది తరాలను కూడా उद्धరిస్తారు. కాబట్టి, ఓ భరతశ్రేష్ఠా, సువర్ణదానంపై దృఢ సంకల్పం స్థిరపరచు.
भीष्म उवाच