उन्ड्शश्नाब्रुवन् सर्वे पश्यध्वं तपसो बलम् | क्रुद्धा अपि मुनिश्रेष्ठ॑ वीक्षितुं नेह शकनुम:,दो-दो आदमी अलग-अलग खड़े होकर आपसमें कहने लगे--“भाइयो! सब लोग मुनिकी तपस्याका बल तो देखो, हमलोग क्रोधमें भरे हुए हैं तो भी मुनिश्रेष्ठकी ओर यहाँ आँख उठाकर देख भी नहीं सकते
అప్పుడు అందరూ విడివిడిగా నిలబడి పరస్పరం ఇలా అన్నారు—“చూడండి, తపస్సు బలం ఎంత గొప్పదో! మనం కోపంతో మండుతున్నా, ఇక్కడ మునిశ్రేష్ఠుని వైపు కన్నెత్తి చూడటానికీ శక్తి లేదు।”
भीष्म उवाच