ब्रहद्माणं सारथिं कृत्वा विनियुज्य च सर्वश:ः । त्रिपर्वणा त्रिशल्येन तेन तानि बिभेद सः,उनके ऐसा कहनेपर भगवान् शिवने “तथास्तु” कहकर उनकी बात मान ली और भगवान् विष्णुको उत्तम बाण, अग्निको उस बाणका शल्य, वैवस्वत यमको पंख, समस्त वेदोंको धनुष, गायत्रीको उत्तम प्रत्यंचा और ब्रह्माको सारथि बनाकर सबको यथावत् रूपसे अपने-अपने कार्योंमें नियुक्त करके तीन पर्व और तीन शल्यवाले उस बाणके द्वारा उन तीनों पुरोंको विदीर्ण कर डाला
brahmāṇaṁ sārathiṁ kṛtvā viniyujya ca sarvaśaḥ | triparvaṇā triśalyena tena tāni bibheda saḥ ||
బ్రహ్మను సారథిగా నియమించి, సమస్త శక్తులను యథావిధిగా వారి వారి కార్యాలలో నియోగించి, మూడు పర్వాలు మూడు శల్యాలు గల ఆ బాణంతో ఆయన ఆ (మూడు) పురాలను చీల్చివేశాడు.
वायुदेव उवाच