अध्याय १६ — शङ्कर-उमा-वरदानम् तथा तण्डि-स्तुतिः (Śaṅkara–Umā Boon-Granting and Taṇḍi’s Hymn)
ब्रह्मा शतक्रतुर्विष्णुर्विश्वेदेवा महर्षय: । न विदुस्त्वामिति ततस्तुष्ट: प्रोवाच तं शिव:,तण्डिने स्तुति करते हुए यह बात कही थी कि “ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, विश्वेदेव और महर्षि भी आपको यथार्थरूपसे नहीं जानते हैं', इससे भगवान् शंकर बहुत संतुष्ट हुए और बोले --
“బ్రహ్మ, శతక్రతు (ఇంద్రుడు), విష్ణువు, విశ్వేదేవులు, మహర్షులు కూడా నిన్ను యథార్థంగా ఎరుగరు”—అని విన్న శివుడు అత్యంత సంతోషించి తండితో పలికెను।
वायुदेव उवाच