धर्मनिन्दा–धर्मोपासनाफलम् तथा साध्वाचारलक्षणम्
Fruits of Disparaging vs. Observing Dharma; Marks of Good Conduct
एते योनिफला देवि स्थानभागनिदर्शका: । स्वयं च वरदेनोक्ता ब्रह्मणा सृजता प्रजा:,देवि! ये जो चारों वर्णोंके स्थान और विभाग बतलाये गये हैं, ये उस-उस जातिमें जन्म ग्रहण करनेके फल हैं। प्रजाकी सृष्टि करते समय वरदाता ब्रह्माजीने स्वयं ही यह बात कही है
దేవీ! వర్ణాల స్థానాలు, విభాగాలు అని చెప్పబడినవి జన్మ (యోని) ఫలాలను సూచించేవే. ప్రజలను సృష్టించే సమయంలో వరదాత బ్రహ్మదేవుడు స్వయంగా ఇదే పలికాడు.
श्रीमहेश्वर उवाच