Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
(आश्रमस्याभिगमने कि त्वं कार्य चिकीर्षसि । कस्त्वमद्येह सम्प्राप्तो महर्षेराश्रमं शुभम् ।।) “आपके आश्रमकी ओर पधारनेका क्या कारण है? आप यहाँ कौन-सा कार्य सिद्ध करना चाहते हैं? आपका परिचय क्या है? आप कौन हैं? और आज यहाँ महर्षिके इस शुभ आश्रमपर (किस उद्देश्यसे) आये हैं? तामब्रवीत् ततो राजा कन्यां मधुरभाषिणीम् | दृष्टवा चैवानवद्याजीं यथावत् प्रतिपूजित:,उसके द्वारा विधिवत् किये हुए आतिथ्य सत्कारको ग्रहण करके राजाने उस सर्वांगसुन्दरी एवं मधुरभाषिणी कन््याकी ओर देखकर कहा
āśramasyābhigamane ki tvaṃ kāryaṃ cikīrṣasi | kas tvam adyeha samprāpto maharṣer āśramaṃ śubham ||
“ఈ ఆశ్రమమునకు మీరు ఎందుకు వచ్చితిరి? ఇక్కడ ఏ కార్యము సిద్ధించదలచితిరి? మీరు ఎవరు—మీ పరిచయం ఏమిటి? మరియు ఈ రోజు మహర్షి యొక్క ఈ శుభాశ్రమమునకు ఏ ఉద్దేశ్యముతో వచ్చితిరి?” అని ఆమె అడిగెను. ఆమె చేసిన విధివిధానమైన అతిథిసత్కారమును స్వీకరించిన రాజు, ఆ సర్వాంగసుందరి మధురభాషిణి కన్యను చూచి పలికెను.
वैशम्पायन उवाच