आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
पश्चिमानूपकं विद्धि तं नूपं नृपसत्तम | गविष्ठस्तु महातेजा य: प्रख्यातो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
vaiśampāyana uvāca |
paścimānūpakaṃ viddhi taṃ nūpaṃ nṛpasattama |
gaviṣṭhas tu mahātejā yaḥ prakhyāto mahāsuraḥ |
ayāḥśirā aśvaśirā vīryavān ayaḥśaṅkuḥ gaganamūrdhā ca vegavān—rājan—ime pañca parākramiṇaḥ mahādaityāḥ kekayadeśasya pradhāna-pradhāna-mahātmā-rājā-rūpeṇa utpannāḥ ||
(tataḥ paraṃ ślokānusāreṇa) ketumān, ugraśena, aśoka, hārdikya, dīrghaprajña, śālva, rocamāna, bṛhadratha, senābindu, nagnajit, prativindhya, citradharmā, subāhu, bāhlika, muñjakeśa, devādhipa, paurava, supārśva, pārvatīya, prahmada, candravarmā, ṛṣika, (paścimānūpadeśe) mṛtpa, drumaseṇa, viśva, kālakīrti, śunaka, jānaki, kāśirāja, krātha (rāhu) iti nāmāni rājānaḥ prakhyātāḥ ||
వైశంపాయనుడు పలికెను— ఓ నృపశ్రేష్ఠా, ‘మృతపా’ను పశ్చిమ అనూప దేశాధిపతిగా తెలుసుకొనుము. మరియు ‘గవిష్ఠ’ అనే మహాతేజస్సుగల ప్రసిద్ధ మహాసురుడు భూమిపై ‘ద్రుమసేన’ అనే రాజుగా జన్మించెను. ఇదే విధముగా అయఃశిరా, అశ్వశిరా, అయఃశంకు, గగనమూర్ధా, వేగవాన్ మొదలైన అనేక దైత్య-అసురులు కేకయ, శాల్వ, కాంబోజ, కాశి మొదలైన దేశములలో ప్రధాన రాజుల రూపమున జన్మించిరి. ఈ ప్రసంగము ధర్మదృష్టితో చెప్పునది— రాజవైభవము వంశశుద్ధికి మాత్రమే నిదర్శనం కాదు; క్రూరప్రవృత్తులు కూడ సింహాసనమున అధిరోహించి లోకవ్యవస్థను కలవరపెడతాయి. కనుక రాజుని ధర్మము ఆచరణ, సంయమములచేనే పరీక్షింపబడును।
वैशम्पायन उवाच
The passage cautions that political authority and fame can arise from fierce, non-dharmic origins; therefore, legitimacy is not merely birth or power but righteous conduct. It invites discernment: a king must be judged by dharma, not by splendor or conquest.
Vaiśampāyana continues a catalog of beings—Daityas/Asuras—who took human birth as prominent kings across various regions. In this specific verse-focus, he identifies the ruler of western Anūpa (Mṛtpa) and states that the Asura Gaviṣṭha became King Drumasena, within a broader list of such identifications.