आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
सुरकार्य हि नः कार्यमसुराणां क्षितौ वध: । तत्र यास्यत्ययं वर्चा न च स्थास्यति वै चिरम्,'पृथ्वीपर असुरोंका वध करना देवताओंका कार्य है और वह हम सबके लिये करनेयोग्य है। अतः उस कार्यकी सिद्धिके लिये यह वर्चा भी वहाँ अवश्य जायगा। परंतु दीर्घकालतक वहाँ नहीं रह सकेगा
భూమిపై అసురుల వధ చేయుట దేవతల కార్యమే, అది మన అందరికీ చేయవలసిన కర్తవ్యము. అందుచేత ఆ కార్యసిద్ధి కొరకు ఈ వర్చా కూడా అక్కడికి తప్పక వెళ్తాడు; కాని అక్కడ దీర్ఘకాలము నిలువడు.
वैशम्पायन उवाच