Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
स॒ उपाध्यायवचनादरक्षद् गाः;: स चाहनि गा रक्षित्वा दिवसक्षये गुरुगृहमागम्योपाध्यायस्याग्रत: स्थित्वा नमश्नक्रे,उपाध्यायकी आज्ञासे उपमन्यु गौओंकी रक्षा करने लगा। वह दिनभर गौओंकी रक्षामें रहकर संध्याके समय गुरुजीके घरपर आता और उनके सामने खड़ा हो नमस्कार करता
ఉపాధ్యాయుని వాక్యానుసారం ఉపమన్యు గోవులను కాపాడసాగాడు. అతడు పగలంతా గోవులను కాపాడి, సాయంకాలానికి గురుగృహానికి వచ్చి, ఉపాధ్యాయుని ఎదుట నిలబడి నమస్కరించేవాడు.
राम उवाच