कर्णस्य मन्त्रः — Duryodhana-प्रति नीति-विचारः
Karna’s Counsel on Strategy toward the Pāṇḍavas
ततः कुन्ती च कृष्णा च भीमसेनार्जुनावपि । यमौ च राज्ञा संदिष्टं विविशुर्भवनं महत्,राजन! तत्पश्चात् कुन्ती, कृष्णा, युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव राजा द्रुपदके द्वारा निर्दिष्ट किये हुए विशाल भवनमें गये और यज्ञसेन (ट्रपद)-से सम्मानित हो वहीं रहने लगे। इस प्रकार विश्वास जम जानेपर महाराज ट्रुपदने अपने पुत्रोंके साथ जाकर युधिष्ठिससे कहा--
tataḥ kuntī ca kṛṣṇā ca bhīmasenārjunāv api | yamau ca rājñā saṃdiṣṭaṃ viviśur bhavanaṃ mahat, rājan |
ఆ తరువాత కుంతీ, కృష్ణా, భీమసేనుడు, అర్జునుడు, అలాగే యమజులైన ఇద్దరూ రాజు సూచించిన మహా భవనంలో ప్రవేశించారు।
वैशम्पायन उवाच