नियोगप्रसङ्गः — The Niyoga Episode: Births of Dhṛtarāṣṭra, Pāṇḍu, and Vidura
द्यवे वै दर्शयामास तां गां गोवृषभेक्षण । आपीनां च सुदोग्ध्रीं च सुवालधिखुरां शुभाम्,वृषभके समान विशाल नेत्रोंवाले महाराज! उस देवीने द्यो नामक वसुको वह शुभ गाय दिखायी, जो भलीभाँति हृष्ट-पुष्ट थी। दूधसे भरे हुए उसके थन बड़े सुन्दर थे, पूँछ और खुर भी बहुत अच्छे थे। वह सुन्दर गाय सभी सदगुणोंसे सम्पन्न और सर्वोत्तम शील-स्वभावसे युक्त थी। पूरवंशका आनन्द बढ़ानेवाली सम्राट! इस प्रकार पूर्वकालमें वसुका आनन्द बढ़ानेवाली देवीने अपने पति वसुको ऐसे सदगुणोंवाली गौका दर्शन कराया। गजराजके समान पराक्रमी महाराज! द्योने उस गायको देखते ही उसके रूप और गुणोंका वर्णन करते हुए अपनी पत्नीसे कहा--'यह कजरारे नेत्रोंवाली उत्तम गौ दिव्य है। वरारोहे! यह उन वरुणनन्दन महर्षि वसिष्ठकी गाय है, जिनका यह उत्तम तपोवन है। सुमध्यमे! जो मनुष्य इसका स्वादिष्ट दूध पी लेगा, वह दस हजार वर्षोतक जीवित रहेगा और उतने समयतक उसकी युवावस्था स्थिर रहेगी।' नृपश्रेष्ठ! सुन्दर कटि-प्रदेश और निर्दोष अंगोंवाली वह देवी यह बात सुनकर अपने तेजस्वी पतिसे बोली--'प्राणनाथ! मनुष्यलोकमें एक राजकुमारी मेरी सखी है”
Vaiśampāyana uvāca |
Dyave vai darśayāmāsa tāṃ gāṃ govṛṣabhekṣaṇa |
Āpīnāṃ ca sudogdhrīṃ ca su-vāladhi-khurāṃ śubhām ||
వైశంపాయనుడు పలికెను—గోవృషభదృష్టి గల రాజా! ఆ దేవి ద్యు అనే వసువుకు ఆ శుభ గోవును చూపెను—ఆమె పుష్టిగా, ఉత్తమంగా పాలు ఇచ్చేలా, అందమైన తోక మరియు ఖురాలతో యుక్తంగా ఉండెను.
वैशम्पायन उवाच
The verse highlights how extraordinary gifts (here, a supremely auspicious cow) can become a test of self-control and dharma: admiration of beauty and utility should not slide into possessiveness or wrongdoing.
Vaiśampāyana narrates that a goddess shows Dyu a remarkable cow—well-nourished, auspicious, and an excellent milker—setting up the later development in which this cow’s exceptional qualities become central to the unfolding story.