Kuru-Sainika-Āśvāsana and Vijayaghoṣaṇa
Reassuring the Kuru Soldiers; Proclaiming Victory
श्रुत्वा गाण्डीवनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशने: । त्रस्तानि सर्वसैन्यानि व्यपागच्छन् महाहवात्,गाण्डीवकी टंकार वज़्की गड़गड़ाहटको भी मात कर रही थी। उसे सुनकर समस्त सैनिक भयभीत हो उस महान् संग्रामसे भाग निकले। युद्धके मुहानेपर कुण्डल और पगड़ी धारण किये असंख्य कटे हुए सिर पड़े दिखायी देते थे। कितने ही सोनेके हार इधर-उधर गिरे थे
śrutvā gāṇḍīvanirghoṣaṃ visphūrjitam ivāśaneḥ | trastāni sarvasainyāni vyapāgacchan mahāhavāt ||
காண்டீவத்தின் பேரொலி மின்னல்-இடிமுழக்கம் போலக் கேட்க, எல்லாப் படைகளும் அஞ்சித் திகைத்து அந்த மகாபோரிலிருந்து பின்வாங்கின।
वैशम्पायन उवाच