सगरोपाख्यानम् — कपिलकोपः, अंशुमतः विनयः, तथा भगीरथपरम्परा
Sagara Upākhyāna: Kapila’s Wrath, Aṃśumān’s Reverence, and the Bhāgīratha Line
ते चैव सर्वे सहिता: क्षयं यास्यन्ति पार्थिव | एको वंशधर: शूर एकस्यां सम्भविष्यति,“नरश्रेष्ठ! तुम्हारी एक पत्नीके गर्भसे अत्यन्त अभिमानी साठ हजार शूरवीर पुत्र होंगे, परंतु वे सब-के-सब एक ही साथ नष्ट हो जायँगे। भूपाल! तुम्हारी जो दूसरी पत्नी है, उसके गर्भसे एक ही शूरवीर वंशधर पुत्र उत्पन्न होगा”
te caiva sarve sahitāḥ kṣayaṃ yāsyanti pārthiva | eko vaṃśadharaḥ śūra ekasyāṃ sambhaviṣyati ||
“அரசே! அவர்கள் அனைவரும் ஒன்றாகவே அழிவை அடைவர்; ஆனால் உன் ஒரு ராணியிடமோ ஒரே ஒரு வீர வம்சதாரன் பிறப்பான்.”
लोगश उवाच