Udyoga Parva, Adhyāya 106: Pūrva-Diśa Praśaṃsā
Praise and Primacy of the Eastern Quarter
कुतो मे भोज ने श्रद्धा सुखश्रद्धा कुतश्च मे । श्रद्धा मे जीवितस्यापि छिन्ना कि जीवितेन मे,“ऐसी दशामें मुझे भोजनकी रुचि कहाँसे हो? सुख भोगनेकी इच्छा कहाँसे हो? और इस जीवनसे भी मुझे क्या प्रयोजन है? इस जीवनको सुरक्षित रखनेके लिये मेरा जो उत्साह था, वह भी नष्ट हो गया
नारद उवाच