Udyoga Parva, Adhyaya 104: Nārada on Suhṛt and Nirbandha; the Viśvāmitra–Gālava Exemplum Begins
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३१ “लोक हैं।] अपने-आप बछ। अंक पञ्चाधिकशततमोब< ध्याय: भगवान् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना कण्व उवाच गरुडस्तत्र शुभ्राव यथावृत्तं महाबल: । आयु:प्रदानं शक्रेण कृतं नागस्य भारत,कण्व मुनि कहते हैं--भारत! महाबली गरुड़ने यह सारा वृत्तान्त यथार्थरूपसे सुना कि इन्द्रने सुमुख नागको दीर्घायु प्रदान की है
kaṇva uvāca |
garuḍas tatra śuśrāva yathāvṛttaṃ mahābalaḥ |
āyuḥ-pradānaṃ śakreṇa kṛtaṃ nāgasya bhārata ||
கண்வ முனிவர் கூறினார்—ஓ பாரதா! அங்கே மகாபலவான் கருடன் நிகழ்ந்ததை அப்படியே கேட்டான்—சக்ரன் (இந்திரன்) சுமுக நாகனுக்கு நீண்ட ஆயுளை அளித்தான் என்று.
कण्व उवाच