ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
त्वं हि नः परमो वक्ता लोके5स्मिन् भरतर्षभ । एतदू भवन्तं पृच्छामि तनमे त्वं वक्तुमहसि,युधिष्ठिरने पूछा--भूपाल! जो मनुष्य बन्धु-बान्धवोंका अथवा राज्यका नाश हो जानेपर घोर संकटमें पड़ गया हो, उसके कल्याणका क्या उपाय है? भरतश्रेष्ठ! इस संसारमें आप ही हमारे लिये सबसे श्रेष्ठ वक्ता हैं; इसलिये यह बात आपसे ही पूछता हूँ। आप यह सब मुझे बतानेकी कृपा करें
tvam hi naḥ paramo vaktā loke 'smin bharatarṣabha | etad eva bhavantaṃ pṛcchāmi tan me tvaṃ vaktum arhasi ||
ஓ பரதகுலச் சிறந்தவரே! இவ்வுலகில் நீங்கள் எங்களுக்குப் பரம உரையாளர். ஆகவே இதையே உம்மிடமே கேட்கிறேன்; அருள்கூர்ந்து எனக்கு இதை விளக்குங்கள்.
भीष्म उवाच