Adhyāya 59: Vidura’s Admonition to Duryodhana after the Summons of Draupadī (सभा पर्व)
इसी प्रकार आप यदि मेरे पास आकर यह मानते हैं कि आपके साथ शठता की जायगी एवं यदि आपको भय मालूम होता है तो इस जूएके खेलसे निवृत्त हो जाइये ।। युधिछिर उवाच आहूतो न निवर्तेयमिति मे व्रतमाहितम् । विधिश्व॒ बलवान् राजन् दिष्टस्यास्मि वशे स्थित:,युधिष्ठिरने कहा--राजन्! मैं बुलानेपर पीछे नहीं हटता, यह मेरा निश्चित व्रत है। दैव बलवान है। मैं दैवके वशमें हूँ
Yudhiṣṭhira uvāca: āhūto na nivarteyam iti me vratam āhitam | vidhis tu balavān rājan diṣṭasyāsmi vaśe sthitaḥ ||
யுதிஷ்டிரன் கூறினான்—அரசே! அழைக்கப்பட்ட பின் நான் விலகமாட்டேன்; அது என் உறுதியான விரதம். விதி வலிமைமிக்கது; நான் தெய்வம் விதித்ததின் ஆட்சிக்குள் நிற்கிறேன்.
युधिछिर उवाच