भीष्मपर्व — अध्याय ९६: सौभद्रस्य आक्रमणम्, अलम्बुसस्य प्रतिविधानम्
Abhimanyu’s assault; Alambusa’s counter-engagement
कितने ही कुलीन रथी अपने शरीरोंको निछावर करके भारी-से-भारी शक्ति लगाकर विपक्षी रथियोंके साथ निर्भयकी भाँति महान् पराक्रम प्रकट कर रहे थे ।। स्वयंवर इवामर्दे प्रजहुरितरेतरम् प्रार्थयाना यशो राजन् स्वर्ग वा युद्धेशालिन:,राजन! युद्धमें शोभा पानेवाले वीर स्वर्ग अथवा यश पानेकी इच्छा रखकर स्वयंवरकी भाँति उस युद्धमें एक-दूसरेपर प्रहार कर रहे थे
svayaṃvara ivāmarde prajahur itaretaram | prārthayānā yaśo rājan svargaṃ vā yuddhe śālinaḥ ||
சஞ்சயன் கூறினான்—அரசே! போரில் ஒளிரும் வீரர்கள் புகழோ அல்லது சொர்க்கமோ வேண்டி, சுயம்வரத்தில் போல, அந்தப் போர்க்களத்தில் ஒருவரையொருவர் தாக்கினர்.
संजय उवाच