अध्याय ८० — मध्यंदिन-रणवृत्तान्तः
Yudhiṣṭhira–Śrutāyu encounter; Cekitāna–Gautama clash; Abhimanyu pressure; Arjuna’s redeployment
प्रतिपालय मां सूत नियम्याश्वान् मुहूर्तकम् । यावदेतान् निहन्म्यद्य य इमे मद्वधोद्यता:,“जाते समय पुरुषसिंह भीमसेनने मुझसे प्रेमपूर्वक यह बात कही कि सूत! तुम दो घड़ीतक इन घोड़ोंको रोककर यहीं मेरी प्रतीक्षा करो। जबतक कि ये जो लोग मेरा वध करनेके लिये उद्यत हैं, इन्हें अभी मार न डालूँ
pratipālaya māṁ sūta niyamyāśvān muhūrtakam | yāvad etān nihany adya ya ime mad-vadhodyatāḥ ||
“சூதனே, குதிரைகளை அடக்கி சிறிது நேரம் இங்கே எனக்காகக் காத்திரு; இன்று என்னைக் கொல்லத் துணிந்துள்ள இவர்களை நான் வீழ்த்தும் வரை.”
संजय उवाच