अध्याय ५५ — भीष्मस्य प्रचण्डविक्रमः, अर्जुनप्रत्युत्तरं, कृष्णस्य चक्रोद्यतिः
Chapter 55: Bhīṣma’s onslaught, Arjuna’s counter, and Kṛṣṇa’s raised discus
दुःशासनादीत् भ्रातृश्च सर्वानेव च भारत | अन्यांश्व सुबहून् शूरान् युद्धाय समुपागतान्,संजय कहते हैं--महाराज! उस अत्यन्त भयंकर अभेद्य क्रौंचव्यूहको अमिततेजस्वी अर्जुनके द्वारा सुरक्षित देखकर आपका पुत्र दुर्योधन आचार्य द्रोण, कृप, शल्य, भूरिश्रवा, विकर्ण, अश्वत्थामा और दुःशासन आदि सब भाइयों तथा युद्धके लिये आये हुए अन्य बहुतेरे शूरवीरोंके पास जाकर उन सबका हर्ष बढ़ाता हुआ यह समयोचित वचन बोला --वीरो! आप सब लोग नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंके प्रहारमें कुशल तथा युद्धकी कलामें निपुण हैं
duḥśāsanādīt bhrātṝś ca sarvān eva ca bhārata | anyāṁś ca bahūn śūrān yuddhāya samupāgatān ||
சஞ்சயன் கூறினான்—ஓ பாரதா (த்ருதராஷ்டிரா)! துரியோதனன் துஃசாசனனையும் தன் சகோதரர் அனைவரையும், மேலும் போருக்காக கூடியிருந்த பல வீரர்களையும் அணுகினான்.
संजय उवाच