Mokṣa–Saṃnyāsa–Tyāga–Guṇa-Vibhāga (Renunciation, Relinquishment, and the Three Guṇas) — Mahābhārata 6, Bhīṣma-parva
सम्बन्ध-- इस प्रकार नित्य विज्ञानानन्न्दधन आत्मतत्त्वको सर्वत्र समभावसे देखनेका महत्त्व और फल बतलाकर अब जगले श्लोकमें उसे अकर्ता देखनेवालेकी महिमा कहते हैं प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वश: । यः पश्यति तथा55त्मानमकर्तारें स पश्यति,और जो पुरुष सम्पूर्ण कर्मोंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही किये जाते हुए देखता है और आत्माको अकर्ता देखता है, वही यथार्थ देखता हैं
prakṛtyaiva ca karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ | yaḥ paśyati tathātmānam akartāraṃ sa paśyati ||
எல்லாக் கருமங்களும் எல்லா வகையிலும் இயற்கையாலேயே நிகழ்கின்றன. இதைக் கண்டு, ஆத்மாவை அகర్తா எனக் காண்பவனே உண்மையாகக் காண்கிறான்.
अजुन उवाच