अक्षरब्रह्मयोगः | Akṣara-Brahma-Yoga
The Yoga of the Imperishable Brahman
सम्बन्ध-- पूर्वश्लोकमें योगीको सर्वश्रेष्ठ बतलाकर भगवान्ने अ्जुनिको योगी बननेके लिये कहा; किंतु ज्ञानयोग, ध्यानयोयग, भ्क्तियोंग और कर्मयोग आदि साधनोंगेंसे अर्जुनको कौन-सा साधन करना चाहिये? इस बातका स्पष्टीकरण नहीं किया। अतः अब भगवान् अपनेगें अनन्यप्रेम करनेवाले भक्त योगीकी प्रशंसा करते हुए अर्जुनकों अपनी ओर आकर्षित करते हैं-- योगिनामपि सर्वेषां5 मद्गतेनान्तरात्मनाए | श्रद्धावान्भजतेः * यो मां" स मे युक्ततमो मत:,सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें लगे हुए अन्तरात्मासे मुझको निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य हैः
yoginām api sarveṣāṁ mad-gatenāntar-ātmanā | śraddhāvān bhajate yo māṁ sa me yuktatamo mataḥ ||
அனைத்து யோகிகளிலும், உள்ளார்ந்த ஆத்மாவை என்னுள் ஒன்றாக்கி, நம்பிக்கையுடன் என்னை இடையறாது வழிபடுகிற யோகியே—என் கருத்தில் மிகச் சிறந்த ஒன்றுபட்டவன் (யுக்ததமன்).
अजुन उवाच