[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ ६ श्लोक मिलाकर कुल ४८ ६ “लोक हैं।] हि (> > जयत्सेन नामके दो व्यक्ति प्रतीत होते हैं, एक पाण्डवपक्षमें और दूसरे कौरवपक्षमें रहे होंगे। पञ्चदशाधिकशततमो< ध्याय: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध धृतराष्ट्र रवाच कथं शान्तनवो भीष्मो दशमे5हनि संजय । अयुध्यत महावीर्य: पाण्डवै: सहसूंजयै:,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! दसवें दिन महापराक्रमी शान्तनुकुमार भीष्मने पाण्डवों तथा सूंजयोंके साथ किस प्रकार युद्ध किया तथा कैरवोंने पाण्डवोंको युद्धमें किस प्रकार रोका? रणक्षेत्रमें शोभा पानेवाले भीष्मके उस महायुद्धका वृत्तान्त मुझसे कहो
dhṛtarāṣṭra uvāca | kathaṃ śāntanavo bhīṣmo daśame 'hani saṃjaya | ayudhyata mahāvīryaḥ pāṇḍavaiḥ saha sṛñjayaiḥ ||
துருதராஷ்டிரன் கூறினான்—சஞ்சயா! பத்தாம் நாளில் மாபெரும் வீரத்தையுடைய சாந்தனுவின் மகன் பீஷ்மன், பாண்டவர்களுடனும் ஸ்ரிஞ்ஜயர்களுடனும் எவ்வாறு போரிட்டான்? போர்க்களத்தில் ஒளிவீசிய அந்த மகாயுத்தத்தின் வரலாற்றை எனக்குச் சொல்.
संजय उवाच