Adhyāya 112: Bhīṣma-prati Arjunasya Pravṛttiḥ
Arjuna’s Forward Drive Toward Bhīṣma
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका ई “लोक मिलाकर कुल ६० ई “लोक हैं।] न२्डचप्स्सिलििस्स ह्य ४ «आर नवाधिकशततमो<्ध्याय: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार धृतराष्ट्र रवाच कथं शिखण्डी गाड्रेयमभ्यधावत् पितामहम् । पाज्चाल्य: समरे क्ुद्धों धर्मात्मानं यतव्रतम्,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! पांचालराजकुमार शिखण्डीने समरभूमिमें कुपित होकर नियमपूर्वक व्रतका पालन करनेवाले धर्मात्मा पितामह गंगानन्दन भीष्मपर किस प्रकार धावा किया?
dhṛtarāṣṭra uvāca | kathaṁ śikhaṇḍī gāṅgreyam abhyadhāvat pitāmaham | pāñcālyaḥ samare kruddho dharmātmānaṁ yatavratam ||
துருதராஷ்டிரன் கேட்டான்—சஞ்சயா! போரில் கோபம் கொண்டு பாஞ்சால இளவரசன் சிகண்டி, தர்மாத்மாவும் விரதநிஷ்டனும் கங்கையின் மகனுமான பிதாமகன் பீஷ்மனை எவ்வாறு தாக்கி விரைந்தான்?
संजय उवाच