Āśvamedhika-parva, Adhyāya 14
Consolation of Yudhiṣṭhira; Rites and Gifts; Return to Hastināpura
नारदेनाथ भीमेन नकुलेन च पार्थिव । कृष्णया सहदेवेन विजयेन च धीमता,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! इस प्रकार साक्षात् विष्टरश्रवा (विस्तृत यशवाले) भगवान् श्रीकृष्ण, श्रीकृष्णद्वैपायन व्यास, देवस्थान, नारद, भीमसेन, नकुल, द्रौपदी, सहदेव, बुद्धिमान् अर्जुन तथा अन्यान्य श्रेष्ठ पुरुषों और शास्त्रदर्शी ब्राह्मणों एवं तपोधन मुनियोंके बहुविध वचनोंद्वारा समझाने-बुझानेपर जिनके भाई-बन्धु मारे गये थे, उन राजर्षि युधिष्ठिरका मन शान्त हुआ और उन्होंने शोकजनित दुःख तथा मानसिक संतापको त्याग दिया
nāradenātha bhīmena nakulena ca pārthiva | kṛṣṇayā sahadevena vijayena ca dhīmatā ||
வைசம்பாயனர் கூறினார்—அரசே, நாரதர், பீமன், நகுலன், கிருஷ்ணை (த்ரௌபதி), சகதேவன், மேலும் அறிவுடைய விஜயன் (அர்ஜுனன்) ஆகியோரும் பலவகையாக அறிவுரை கூறி அவரை ஆற்றுவித்தனர்.
वैशम्पायन उवाच