कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
एवंशीलसमाचार: स्वर्गे समुपजायते । तत्रासौ भवने दिव्ये मुदा वसति देववत्,इसके विपरीत जो मनुष्य सब प्राणियोंके प्रति दयादृष्टि रखता है, सबको मित्र समझता है, सबके ऊपर पिताके समान स्नेह रखता है, किसीके साथ वैर नहीं करता और इन्द्रियोंको वशमें किये रहता है, जो हाथ-पैर आदिको अपने अधीन रखकर किसी भी जीवको न तो उद्वेगमें डालता और न मारता ही है, जिसपर सब प्राणी विश्वास करते हैं, जो रस्सी, डंडे, ढेले और घातक अस्त्र-शस्त्रोंसे प्राणियोंको कष्ट नहीं पहुँचाता, जिसके कर्म कोमल एवं निर्दोष होते हैं तथा जो सदा ही दयापरायण होता है, ऐसे स्वभाव और आचरणवाला पुरुष स्वर्गलोकमें दिव्य शरीर धारण करता है और वहाँके दिव्य भवनमें देवताओंके समान आनन्दपूर्वक निवास करता है
evaṁśīlasamācāraḥ svarge samupajāyate | tatrāsau bhavane divye mudā vasati devavat ||
இத்தகைய குணமும் நடத்தையும் உடையவன் ஸ்வர்க்கத்தில் பிறக்கிறான். அங்கே அவன் ஒளிமிகு தெய்வீக மாளிகையில் தேவர்களைப் போல மகிழ்ச்சியுடன் வாழ்கிறான்.
श्रीमहेश्वर उवाच