Ādi Parva, Adhyāya 181 — Svayaṃvara Aftermath: Arjuna–Karna Exchange and Bhīma–Śalya Contest
ब्राह्मणं ब्राह्मणीं चैव मिथुनायोपसंगतौ । तौतं वीक्ष्य सुवित्रस्तावकृतार्थोी प्रधावितो,एक दिन भूखसे व्याकुल हो वे अपने लिये भोजनकी तलाश करने लगे। बहुत क्लेश उठानेके बाद उन्होंने देखा कि उस वनके किसी निर्जन प्रदेशमें एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी मैथुनके लिये एकत्र हुए हैं। वे दोनों अभी अपनी इच्छा पूर्ण नहीं कर पाये थे, इतनेहीमें उन राक्षसाविष्ट कल्माषपादको देखकर अत्यन्त भयभीत हो (वहाँसे) भाग चले
brāhmaṇaṁ brāhmaṇīṁ caiva mithunāyopasaṅgatau | tau taṁ vīkṣya su-vitrastāv akṛtārthau pradhāvitau ||
ஒரு பிராமணனும் பிராமணியும்சேர்க்கைக்காக ஒன்றுகூடியிருந்தனர்; அவனைப் பார்த்தவுடன் அவர்கள் இருவரும் மிகுந்த அச்சமடைந்து, ஆசை நிறைவேறுமுன், ஓடினர்।
गन्धर्व उवाच