दीर्घदर्शी महातेजा: पौरजानपदप्रिय: । पाण्डवानामतिरथो यज्ञधर्मपरो वशी,ये दीर्घदर्शी, महातेजस्वी तथा नगर और देशके लोगोंको अत्यन्त प्रिय हैं। ये पाण्डवोंमें अतिरथी वीर हैं एवं सदा यज्ञ और धर्मके अनुष्ठानमें संलग्न तथा मन और इन्द्रियोंको वशमें रखनेवाले हैं
दीर्घदर्शी महातेजाः पौरजानपदप्रियः । पाण्डवानामतिरथो यज्ञधर्मपरो वशी ॥
अर्जुन उवाच