विराट उवाच स्त्रियो गावो हिरण्यं च यच्चान्यद् वसु किउचन । न मे किज्चित् त्वया रक्ष्यमन्तरेणापि देवितुम्,विराटने कहा--्त्रियाँ, गौएँ, सुवर्ण तथा अन्य जो कोई भी धन सुरक्षित रखा जाता है, बिना जूएके वह सब मुझे कुछ नहीं चाहिये। (मुझे तो जूआ ही सबसे अधिक प्रिय है)
विराट उवाच—स्त्रियो गावो हिरण्यं च यच्चान्यद्वसु किञ्चन। न मे किञ्चित्त्वया रक्ष्यमन्तरेणापि देवितुम्॥
विराट उवाच