Virāṭa’s Conciliation and Uttara’s Account of the Unseen Champion
Bṛhannadā/Arjuna
मध्यंदिनगतं सूर्य प्रतपन्तमिवाम्बरे । नाशवनुवन्त सैन्यानि पाण्डवं प्रति वीक्षितुम्,“आकाशमें दोपहरके समय प्रचण्ड किरणोंसे तपते हुए सूर्यकी ओर जैसे कोई देख नहीं सकता, उसी प्रकार प्रतापी पाण्डुपुत्रकी ओर कौरव-सैनिक आँख उठाकर देखनेमें भी असमर्थ हो गये हैं
“मध्यंदिनगतं सूर्यं प्रतपन्तमिवाम्बरे। नाशक्नुवन्त सैन्यानि पाण्डवं प्रति वीक्षितुम्।”
वैशम्पायन उवाच