धनंजय-दुर्योधन-संग्रामः
Arjuna–Duryodhana Engagement and Admonition
कर्ण! आ, रणभूमिमें मेरा सामना कर। समस्त कौरव और तेरे सैनिक सब दर्शक होकर हमारे युद्धको देखें ।। कर्ण उवाच ब्रवीषि वाचा यत् पार्थ कर्मणा तत् समाचर । अतिगशेते हि ते वाक््यं कर्मतत् प्रथितं भुवि,कर्णने कहा--ठुन्तीपुत्र! तू मुझसे जो कुछ कहता है, उसे क्रियाद्वारा करके दिखा। तेरी बातें कार्य करनेकी अपेक्षा बहुत बढ़-चढ़कर होती हैं। यह बात भूमण्डलमें प्रसिद्ध है
Karṇa uvāca: Bravīṣi vācā yat Pārtha, karmaṇā tat samācara. Atigaśete hi te vākyaṁ, karmatattvaṁ prathitaṁ bhuvi.
कर्ण उवाच—यत् पार्थ वाचा ब्रवीषि, तत् कर्मणा समाचर। अतिगच्छति हि ते वाक्यं कर्मणः; एषा ते वाक्कर्मविषमता भुवि प्रथिता।
कर्ण उवाच