Uttara’s Resolve and Draupadī’s Identification of Bṛhannadā as Charioteer (विराट पर्व, अध्याय ३४)
मनसकश्षाप्यभिप्रेतं यथेष्टं भुवि दुर्लभम् । तत् ते5हं सम्प्रदास्यामि सर्वमर्हति नो भवान्,“इस पृथ्वीपर दुर्लभ जो और भी प्रिय तथा मनोवांछित पदार्थ होगा, वह भी मैं आपको दूँगा। आप तो हमारा सब कुछ पानेके अधिकारी हैं
manasakṣāpy abhipretaṃ yatheṣṭaṃ bhuvi durlabham | tat te 'haṃ sampradāsyāmi sarvam arhati no bhavān ||
मनसः कश्चिदभिप्रेतो यथेष्टं भुवि दुर्लभः। तत् तेऽहं सम्प्रदास्यामि; सर्वमर्हति नो भवान्॥
वैशम्पायन उवाच