कृपवाक्यं तथा नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel and a Discourse on Statecraft
न वत्वियं मादृशैर्नीतिस्तस्यथ वाच्या कथंचन । सा वत्वियं साधु वक्तव्या न त्वनीति: कथंचन,'युधिष्ठिरकी जो नीति है, उसकी मेरे-जैसे पुरुषोंको कभी निन्दा नहीं करनी चाहिये। उसे अच्छी नीति ही कहनी चाहिये, अनीति कहना किसी प्रकार ठीक नहीं है
न वक्तव्या मादृशैर्नीतिस्तस्याथ वाच्या कथंचन । सा वक्तव्या साधु वक्तव्या न त्वनीतिः कथंचन ॥
वैशम्पायन उवाच