Nakula’s Adaptive Counsel to Kṛṣṇa in the Kuru Assembly (उद्योगपर्व, अध्याय ७८)
मम चापि स वध्यो हि जगतश्नापि भारत । येन कौमारके यूय॑ सर्वे विप्रकृता: सदा,भारत! जिसने तुम सब लोगोंको कुमारावस्थामें भी सदा नाना प्रकारके कष्ट दिये हैं, जिस दुरात्मा एवं निर्दयीने तुम्हारे राज्यका भी अपहरण कर लिया है तथा जो पापी दुर्योधन युधिष्ठिरके पास सम्पत्ति देखकर शान्त नहीं रह सकता है, वह मेरे और समस्त संसारके लिये भी वध्य है
mama cāpi sa vadhyo hi jagataś cāpi bhārata | yena kaumārake yūyaṁ sarve viprakṛtāḥ sadā ||
अर्जुन उवाच—मम चापि स वध्यो हि जगतश्चापि भारत। येन कौमारके यूयं सर्वे विप्रकृताः सदा॥
अर्जुन उवाच