Sanatsujāta–Dhṛtarāṣṭra Saṃvāda: Pramāda as Mṛtyu
Chapter 42
प्रत्यक्षदर्शी लोकानां सर्वदर्शी भवेन्नर: । सत्ये वै ब्राह्मणस्तिष्ठंस्तद् विद्वान् सर्वविद् भवेत्,जो (योगी) सम्पूर्ण लोकोंको प्रत्यक्ष देख लेता है, वह मनुष्य उन सब लोकोंका द्रष्टा कहलाता है; परंतु जो एकमात्र सत्यस्वरूप ब्रह्ममें ही स्थित है, वही ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मण सर्वज्ञ होता है
pratyakṣadarśī lokānāṁ sarvadarśī bhavennaraḥ | satye vai brāhmaṇas tiṣṭhaṁs tad vidvān sarvavid bhavet ||
प्रत्यक्षदर्शी लोकानां सर्वदर्शी भवेन्नरः । सत्ये वै ब्राह्मणस्तिष्ठंस्तद्विद्वान् सर्वविद् भवेत् ॥
सनत्युजात उवाच