Udyoga-parva Adhyāya 34 — Vidura’s Counsel on Deliberation, Speech-Discipline, and Dharmic Kingship
प्रह्माद उवाच इमौ तौ सम्प्रदृश्येते याभ्यां न चरितं सह । आशीविषाविव क्रुद्धावेकमार्गाविहागतौ,प्रह्नादने (मन-ही-मन) कहा--जो कभी भी एक साथ नहीं चले थे, वे ही दोनों ये सुधन्वा और विरोचन आज साँपकी तरह क़ुद्ध होकर एक ही राहसे आते दिखायी देते हैं
Prahrāda uvāca: imau tau sampradṛśyete yābhyāṃ na caritaṃ saha | āśīviṣāv iva kruddhāv eka-mārgāv iha āgatau ||
प्रह्लाद उवाच—इमौ तौ सम्प्रदृश्येते याभ्यां न चरितं सह। आशीविषाविव क्रुद्धावेकमार्गाविहागतौ॥
प्रह्माद उवाच