Upaśruti Guides Indrāṇī to Indra; Indrāṇī Reports Nahuṣa’s Misconduct (उपश्रुति-इन्द्राणी-इन्द्रदर्शन प्रसङ्गः)
समुद्रं च समासाद्य बहुयोजनविस्तृतम् । आससाद महाद्वीपं नानाद्रुमलतावृतम्,देवताओंके अनेकानेक वन, बहुतसे पर्वत तथा हिमालयको लाँघकर उपश्रुति देवी उसके उत्तर भागमें जा पहुँचीं। तदनन्तर अनेक योजनोंतक फैले हुए समुद्रके पास पहुँचकर उन्होंने एक महाद्वीपमें प्रवेश किया, जो नाना प्रकारके वृक्षों और लताओंसे सुशोभित था
samudraṃ ca samāsādya bahuyojanavistṛtam | āsasāda mahādvīpaṃ nānādrumalatāvṛtam ||
समुद्रं च समासाद्य बहुयोजनविस्तृतम् । आससाद महाद्वीपं नानाद्रुमलतावृतम् ॥
शल्य उवाच